कुशीनगर। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान”ट्रस्ट”के ज्योतिषाचार्य राकेश पाण्डेय भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरितालिका तीज व्रत कहते हैं। इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि दिवा 11:15 तक है। पश्चात चतुर्थी प्रारम्भ हो जायेगी परन्तु उदया तिथि के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत सोमवार को है, पूरे दिन व्रत रहकर सायःकाल श्रध्दा पूर्वक पूजन करें ।इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने सौभाग्य की रक्षा हेतु यह व्रत बड़े ही श्रद्धा से करती है ।
सौभाग्यवती महिलाओं के लिए हरितालिका तीज का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यह व्रत 18 सितम्बर सोमवार को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं निराहर रहकर साय: वेला में पूजन करती हैं। माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि देवी पार्वती ने इस व्रत की शुरुआत की थी। सुहाग की वस्तुएं देवी को चढ़ाने का विधान हरितालिका तीज व्रत में है। यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है। इस दिन स्त्रियों को अन्न और जल का त्याग करना पड़ता है।
हरितालिका पूजन के लिए भगवान शिवजी, माता पार्वती और श्रीगणेश की रेत व काली मिट्टी की प्रतिमा बनाएं। पूजा स्थल को फूलों से सजाकर एक चौकी रखें। चौकी पर केले के पत्ते रखकर शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित करें। सुहाग की वस्तुएं माता पार्वती को और महादेव को वस्त्र चढ़ाएं। पूजन के बाद कथा सुनें और आरती करें। रात्रि में जागरण करना चाहिए जिससे देवी स्वरूप स्त्रियां सदैव सौभाग्यवती बनी रहती हैं ।
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