हाटा/कुशीनगर। तहसील के सुकरौली बाजार से 5किमी दक्षिण दिशा में सिद्ध पीठ माता बंचरा देवी का स्थान है। इस दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से आता है माँ उसकी सब मुराद पुरी करती है।
नवरात्र में तो भक्तो का भीड उमडता ही है बारहो महीने भीड लगा रहता है माँ के दरबार में आने वाले प्रत्येक भक्त की मुराद पुरा होती है। यह सिद्ध पीठ नाथ सम्प्रदाय की अवघड सिद्व पीठ है इससे जुडे और दो सिद्ध पीठ है जो करमहा मठ और मगरुआ मठ के नाम से प्रसिद्ध है।इन मठो पर मां के साथ ही भगवान शिव गणेश,काल भैरव हनुमान जी की प्रतिमा के साथ ही दिव्य सिद्व महापुरुषों की समाधियां भी है।इन मठों पर बारहो महीने भक्तों का आवागमन बना रहता है। इन मठों पर पूर्व में महंत स्वय सिद्ध पुरुष हुआ करते थे जिनकी चर्चा आज भी लोग सम्मान के साथ लोग करते हैं। इन नाथ सम्प्रदाय के संतो मे बाबा दिगुनाथ बाबा हंसनाथ बाबा मथुरानाथ बाबा रक्षानाथ बाबा महाबीरनाथ बाबा मगरुनाथ जैसे अनेक सिद्ध महापुरुषों की यह तपोस्थान व कर्मस्थली रही है इन सिद्ध महापुरुषो के चमत्कारी शक्तियों के साथ लोग आज भी चर्चा करते हैं और आस्था व्यक्त करते हुए दरबार के प्रति लोगों में आस्था बना हुआ है। जहा बंचरा मे माता आदिशक्ति दुर्गा के रूप में , तो करमहा मे कालिका या झकिया माई के रुप में और मगरुआ मे जलपा मां के रुप में मा की पुजा करते हैं। यह स्थान सिद्धि प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण स्थली भी है।
इन दरबारो मे सच्चे मन से पुजा करने वालो को मा कभी निराश नहीं करती है, यह मदिर आज भी वन मे मौजूद हैं आज के दौड में मां की कृपा से भक्त गणों ने निर्माण करा दिया है जो भव्य रुप से सुशोभित हो रहा है।इन सिद्व पीठो के सुंदरीकरण के लिए व पर्यटन स्थल के लिए शासन स्तर से बजट पास हो गया है।
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