हाटा/कुशीनगर। स्थानीय तहसील क्षेत्र के महुई में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक आचार्य व्यास अमरनाथ पाण्डेय ने भगवान शिव और माता सती के विवाह की कथा सुनाई। कथा सुन श्रोता भावविभोर हो गये। कथा व्यास ने कहा कि पुराणों के अनुसार भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक प्रजापति दस हिमाचल क्षेत्र में रहते थे। प्रजापति दक्ष की दो पत्नियां थीं।
प्रसुति और बीरणी। प्रसुति से दक्ष की दो कन्याएं जन्म ली थी।और बीरणी से 60 कन्याएं। राजा दक्ष की पुत्री सती की माता का नाम था। सती ने भगवान शिव से विवाह किया। उनके पुत्र हैं। गणेश, कार्तिकेय और पुत्री वनलता । पार्वती जी से विवाह रचाने के लिए शिव की बारातियों के साथ पहुंचे। उनके साथ बारात में भूत प्रेत और चुड़ेल भी थे। वहीं दुल्हा बने शिवजी ने भस्म से श्रंगार किया था। और हड्डियों की माला पहनी थी।भूत प्रेत की बारातियों और शिव का श्रृंगार देख सभी दंग रह गए।
इस दौरान यजमान रमाशंकर द्विवेदी, विद्यावती देवी, मुन्नी देवी, कमलावती देवी, हर्षिता देवी, नीधि देवी,आचार्य शुभम तिवारी, पं दिवाकर पाण्डेय, उदय नरायन द्विवेदी, नन्हे द्विवेदी, अवधेश द्विवेदी, गौतम मुनि तिवारी, अंकित, रामाश्रय तिवारी, संजय तिवारी आदि मौजूद रहे।
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