कप्तानगंज/कुशीनगर।प्रभात साहित्य सेवा समिति की मासिक काव्य गोष्ठी बुधवार को संस्था के अध्यक्ष इंद्रजीत इंद्र के आवास पर कवि आनन्द कृष्ण त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। संचालन किया विनोद गुप्ता ने।
सर्व प्रथम मां शारदे के चित्र पर अध्यक्ष श्री त्रिपाठी व मेजबान इंद्र ने पुष्पार्चन किया।इसके बाद माँ शारदे की वंदना मेजबान इंद्र जीत से आरम्भ हुई।
इन्होंने यह सुनाया-“मुझको मेरा चमन मेरा गगन मगन मिले जो भी मिले जहां भी मिले मन पसंद मीले।”इसके बाद बेचू बीए ने माँ पर यह गीत सुनाया-“जब जब रोया बचपन में तो माँ ने है दूध पिलाया।और जब भी आफत आई तो माँ ने मुझे बचाया।”
युवा कवि ज्ञानेश नापित ने खूब सुनाया-“मुझको तेरी आदत होने लगी है अब।कंगन की खनक बुलाती है दफ्तर से।”
कवि मधुसुदन पांडेय विद्या वाचस्पति ने भोजपुरी में यह सुनाया-“पियरा पियर पियराईल सिवनवा सिवनवा बीच ना, तितली तौरत गवनवा सिवनवा सिवनवा बीच ना।”बेनिगोपाल शर्मा ने यह पढा-“जब व्यक्ति दुखी होता है तो याद आती है माँ और जब आखों में आंसू हो तो याद आती है माँ।”डा इम्तियाज समर-जहां में मुस्कुराना सिख लो दिलों से दिल लगाना सिख लो।”
नूरुद्दीन नूर -इश्क़ अगर हो जाये यूं खता नहीं करते।हम तो प्यार वाले हैं हम दगा नहीं करते।” इस के बाद कन्हैया करुण ने पढ़ा-
“बेटियों से है संसार ,रिश्ते नातों का अम्बार” अंशदीप गुप्त पीयूष -“मोहब्बत ही को न भूलें तो मय कशी क्या है?”मो अफसर “मैं तुझे क्या बताऊँ मोहब्बत क्या है कर के देख तो जान मोहब्बत क्या है?’इसके बाद संचालन कर रहे विनोद गुप्ता ने यह सुनाया “जितना भी फेकना है उतना फेक दीजिये।अंत में अध्यक्ष ने यह पढ़ा-“जरत घाम में धरती रानी,निखरे नभ के आँसू।”
इसके अलावा शोभा गुप्ता,शौर्य जीत ने भी कविता पाठ किया।साथ ही उपस्थित कवियों ने संस्था के अध्यक्ष जो काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे हैं।उन्हें शीघ्र स्वस्थ होने की कामना किए।
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