कुबेरस्थान/कुशीनगर। प्राचीन शिव शक्ति मंदिर कुबेरनाथ धाम में चल रहे श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि रामकथा त्याग और प्रेरणा की संदेश देती है प्रभु श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता हैं।
उन्होंने कथा को आगे बढ़ाते हुये शिव विवाह का वर्णन जिसे सुनकर हजारों की संख्या में कथा सुन रहे श्रोता मन्त्रमुग्ध हो गये बीच बीच मे हो रहे मंगल गीतों ने पूरे पंडाल को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि धर्म पथ पर चलने के लिए श्रीराम कथा का श्रवण जरूरी है। धर्म का पथ समाज का कल्याण करता है। समाज को सही राह दिखाता है।
उन्होंने प्रभु रामचंद्र के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने की बात कही। कहा कि रामकथा के प्रत्येक पात्र हमें शिक्षा देता है। मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार नाश का कारण बनता है। त्याग और प्रेम की भावना मनुष्य का कल्याण करती है।इसके पूर्व उन्होंने राजा दक्ष के यज्ञ की कथा सुनाते हुए बताया कि राजा दक्ष ने सती शिव को यज्ञ में आमंत्रित नही किया था।जिसके बाद सती यज्ञ में जाती है लेकिन भगवान शिव मना करते है।लेकिन सती जाती है ।तब भगवान शिव नंदी आदि गणों के साथ जाते है और अपमान व पूर्व जन्म के अपमान पर राजा दक्ष का सिर काट देते है।बाद में वे दक्ष को बकरे का सिर जोड़कर यज्ञ पूर्ण कराते है।
इस अवसर पर महंत राजकुमार गिरी, नंदकिशोर द्विवेदी प्रधानाचार्य, मदन गिरी, भगवाधारी मनोज शर्मा, पी के विश्वास, दिनेश तिवारी, संदीप, सुरेश, प्रभुनाथ गिरी सहित मंदिर समिति के कार्यकर्ता तथा क्षेत्र गणमान्य उपस्थित रहे।
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