कुशीनगर। जनपद की पटहेरवा पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए गोवंश तस्करी के मामले में पिछले 6 वर्षों से फरार चल रहे ₹25 हजार के इनामिया वांछित अभियुक्त मो. सद्दाम को नाटकीय अंदाज में गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई में थानाध्यक्ष पटहेरवा धीरेन्द्र कुमार राय की सटीक रणनीति और नेतृत्व निर्णायक साबित हुआ।
बताया जा रहा है कि थाना पटहेरवा पर पंजीकृत मु0अ0सं0 391/2020, धारा 3/5ए/5बी/8 गोबध निवारण अधिनियम, 11 पशु क्रूरता निवारण अधिनियम एवं 467/468/471 भादवि से संबंधित मामले में मो. सद्दाम पुत्र मो. अनीस पिछले छह वर्षों से फरार चल रहा था। उस पर ₹25 हजार का इनाम भी घोषित था। आरोपी मूल रूप से नागलिया अकिल थाना अजीमनगर, जनपद रामपुर का निवासी बताया गया, जबकि सत्यापन में उसका वास्तविक पता शाहगंज, जनपद जौनपुर सामने आया।
बता दे, अभियुक्त सद्दाम फर्जी दस्तावेजों से रचता था तस्करी का जाल, जांच में सामने आया कि अभियुक्त ने ट्रक संख्या HR55M8260 को फैजल पुत्र जकील अहमद निवासी रामपुर से खरीदा था। इसके बाद फर्जी आधार कार्ड बनवाकर वाहन का नया पंजीकरण UP22AT4489 कराया और उसी के जरिए गोवंश तस्करी के अवैध धंधे में सक्रिय हो गया।
मामले में ट्रक चालक पहले ही गिरफ्तार होकर जेल जा चुका था, जिसकी बाद में मृत्यु भी हो गई। वहीं वाहन स्वामी के रूप में सद्दाम लगातार फरार रहा। पुलिस ने जब रामपुर स्थित पते पर जांच की तो वहां इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। आरटीओ जांच में भी कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे मामला और जटिल हो गया।
तकनीकी जांच और मुखबिर तंत्र से मिली सफलता में हरियाणा के गुड़गांव आरटीओ से मिली जानकारी के अनुसार, उक्त वाहन को वर्ष 2018 में चेतक लॉजिस्टिक्स, मानेसर द्वारा खरीदा गया था, जिसे बाद में फैजल ने खरीदकर सद्दाम को बेचा था। फैजल से संपर्क कर पुलिस को आरोपी के आधार कार्ड की कॉपी मिली, जिससे उसके वास्तविक पते का खुलासा हुआ। इसके बाद थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार राय ने टीम के साथ कई बार दबिश दी, लेकिन आरोपी हर बार बच निकलता था। अंततः मुखबिर की सटीक सूचना पर एक सुनियोजित रणनीति बनाकर पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अभियुक्त सद्दाम का आपराधिक इतिहास भी काफी लंबा है। गोवंश तस्करी के अलावा वह देवरिया जिले के सलेमपुर में एनडीपीएस एक्ट के तहत भी वांछित रहा है।
इस सफलता में थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार राय के नेतृत्व में उपनिरीक्षक श्रवण कुमार, अनुराग यादव, रामप्रवेश सिंह, आरक्षी नन्द किशोर शर्मा, संदीप मौर्य, अल्तमस और अमित कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
बहरहाल इस सफलता में यह बात सामने आई है कि रणनीतिक नेतृत्व का नतीजा पूरे ऑपरेशन में थानाध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार राय की सूझबूझ, तकनीकी जांच और मुखबिर नेटवर्क के प्रभावी उपयोग ने यह साबित कर दिया कि संगठित अपराधियों को पकड़ने के लिए धैर्य, रणनीति और टीमवर्क कितना जरूरी होता है। उनकी अगुवाई में पटहेरवा पुलिस ने एक लंबे समय से फरार शातिर अपराधी को पकड़कर कानून का शिकंजा कस दिया है।
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