कुशीनगर। जिले में इन दिनों मिट्टी खनन का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर मिट्टी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां बेखौफ सड़कों पर दौड़ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि खनन के लिए ऑनलाइन अनुमति तो ली जा रही है, मगर मिट्टी ढुलाई में लगे अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर निजी और कृषि कार्य के नाम पर व्यावसायिक उपयोग कैसे किया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग इस पर चुप क्यों हैं?
देर रात तक सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ती इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से उड़ती धूल, ओवरलोडिंग और लापरवाही भरी ड्राइविंग राहगीरों और अन्य वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। कई स्थानों पर तो नाबालिग बच्चे ट्रैक्टर चलाते दिखाई दे रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ गया है। बावजूद इसके स्थानीय पुलिस, परिवहन विभाग और खनन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक जिले के कप्तानगंज, हाटा, खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्रों में इन दिनों जेसीबी और लोडर मशीनों की संख्या अचानक बढ़ गई है। खेतों और खाली जमीनों से बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन कर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए ढुलाई की जा रही है। अधिकांश वाहनों पर “कृषि कार्य” या “निजी कार्य” लिखा हुआ है, जबकि उनका इस्तेमाल खुलेआम व्यावसायिक गतिविधियों में किया जा रहा है। नियमों के अनुसार व्यावसायिक उपयोग वाले वाहनों का कमर्शियल रजिस्ट्रेशन और टैक्स जरूरी है, लेकिन यहां नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
हादसों से भी नहीं लिया सबक
मिट्टी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लापरवाही पहले भी कई जिंदगियां निगल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक सख्ती दिखाई नहीं दे रही। पिछले वर्ष 13 जुलाई को पटहेरवा थाना क्षेत्र में तेज रफ्तार मिट्टी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने श्रद्धालुओं से भरे वाहन को टक्कर मार दी थी, जिसमें कई लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के बाद कुछ दिनों तक कार्रवाई का दिखावा हुआ, लेकिन फिर हालात जस के तस हो गए।
इसी तरह हाटा कोतवाली क्षेत्र के पिपरा और देवराजपुर में मिट्टी खनन के लिए जा रही जेसीबी की चपेट में आने से एक मासूम बच्चे की जान चली गई थी। वहीं 17 मार्च 2026 को पडरौना–मंशाछापर मार्ग पर एक पेट्रोल पंप के पास मिट्टी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से चालक की मौत हो गई थी। लगातार हो रहे हादसों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की निष्क्रियता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
“कब जागेगा प्रशासन?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाया, तो जिले में फिर किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने मांग की है कि बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन चल रहे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की जांच कर कार्रवाई की जाए, नाबालिग चालकों पर रोक लगे और ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो, ताकि सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे इन वाहनों पर लगाम लग सके।
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