कसया/कुशीनगर । सपा जिला सचिव व प्रभारी विधानसभा फाजिलनगर चौधरी शमसुल होदा ने मीडिया से भेंटवार्ता के दौरान कहा कि उत्तरप्रदेश सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में कुछ गिरफ्तारियां करवाकर अपना वाहवाही लूटने का प्रयास करेगी. लेकिन क्या इससे उन युवाओं की क्षति की भरपाई हो पायेगी जो दिनों रात मेहनत से तैयारी कर शिक्षक पात्रता परीक्षा देकर अपने भविष्य को लेकर काफी उम्मीदें संजोये थे.
चौधरी शमसुल होदा ने आगे कहा कि कर्मचारी चयन आयोग (SSC) का पेपर लीक हुआ था. लेकिन सरकार द्वारा भ्रष्टाचारी अध्यक्ष को दो साल का सेवा विस्तार दे दिया गया.
स्वस्थ विभाग में चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी प्रोन्नत परीक्षा में धांधली हुई. लेकिन निदेशक पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
सब इंस्पेक्टर परीक्षा, उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) परीक्षा, उत्तरप्रदेश पुलिस परीक्षा, अधीनस्थ सेवा परीक्षा, नलकूप आपरेटर परीक्षा, सिपाही भर्ती परीक्षा, 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा, बीएड परीक्षा, PET परीक्षा, सहायता प्राप्त स्कूल शिक्षक/प्रधानाचार्य परीक्षा, उत्तर प्रदेश प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक परीक्षा, राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा आदि का पेपर लीक होना निरंकुश परम्परा को दर्शाता है. पिछली गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं पर नजर डालें तो यह साफतौर पर पता चलता है कि गड़बड़ियों के उजागर होने के बाद परीक्षाओं को तो रद्द किया गया लेकिन दोषियों पर कोई दण्डनात्मक कार्रवाई नहीं हुई. जिससे कि पेपर लीक जैसे घिनौने अपराध को रोका जा सके. यह शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं तो और क्या है? पेपर लीक होना लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य की हत्या है. पेपर लीक होने की परंपरा सरकार की असफलता को दर्शाता है.
चौधरी शमसुल होदा ने आगे कहा कि उत्तरप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा का पेपर लीक मामले में संलिप्त अपराधियों को पकड़ना कोई बड़ी बात नहीं है. इन्हें प्रदेश की पुलिस पकड़ ही लेगी. ऐसे अक्षम्य अपराध को रोकना उत्तरप्रदेश सरकार के लिए बड़ी बात है जो सरकारी तंत्र की मदद से चल रहा है. इसकी जिम्मेदार सरकार है. सरकार पेपर लीक मामले में क्या करेगी यह सरकार का काम है सरकार जाने.
लेकिन जो नुकसान उत्तरप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा देने आये अभ्यर्थियों का हुआ है उसका भरपाई कैसे होगा और कौन करेगा? यह सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है. सरकार अपनी जिम्मेदारी से न भागे और पचास हजार रुपए (50,000=00) प्रति अभ्यर्थी क्षतिपूर्ति अदा करे और इस पूरी रकम की वसूली इस अपराध में सम्मिलित अपराधियों से करे. फिर भविष्य में दोबारा इस तरह के अपराध नहीं होंगे यह मेरा दावा है.
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