कुशीनगर । सुबह का वक्त… चारों ओर स्कूल जाते बच्चों की चहचहाहट, सड़कों पर आती-जाती गाड़ियां, और पुल के नीचे बहती नहर का शांत पानी। लेकिन अगले ही पल, इस शांति को चीख-पुकार ने तोड़ दिया—एक स्कूल बस तेज रफ्तार में पुल की रेलिंग तोड़कर नहर के ऊपर लटक चुकी थी, मानो मौत ने बस को अपनी गिरफ्त में ले लिया हो।
कुशीनगर जिले में मंगलवार की यह सुबह जिंदगी और मौत के बीच झूलते एक भयावह दृश्य की गवाह बनी।
समउर-कटेया (बिहार) मार्ग पर सैयनवा गांव के पास फाजिलनगर के एक निजी विद्यालय की बस अचानक अनियंत्रित हो गई। चालक ने स्टेयरिंग मोड़ने की कोशिश की, लेकिन मशीन ने धोखा दे दिया। देखते ही देखते बस पुल की रेलिंग तोड़ते हुए आधी नहर के ऊपर लटक गई।
बस के अगले हिस्से का वजन जैसे ही आगे झुका, मासूम बच्चों की सांसें थम गईं। नन्हीं आंखों में डर, कांपते हाथ, और यह अहसास कि अगला पल उनका आखिरी भी हो सकता है—पूरा दृश्य मानो दिल की धड़कनें रोक देने वाला था।
गांव के लोग शोर सुनकर दौड़े। कुछ ने बच्चों को ढांढस बंधाया, तो कुछ ने हिम्मत जुटाकर बस में घुसे और एक-एक कर मासूमों को बाहर निकाला। जब आखिरी बच्चा सुरक्षित जमीन पर आया, तभी सभी की आंखों से राहत के आंसू बह निकले।
बस में कुल 6 बच्चे सवार थे। सभी सुरक्षित हैं, लेकिन हादसे के बाद बच्चों के चेहरों पर डर और परिजनों की आंखों में चिंता साफ झलक रही थी।
गांव वालों का कहना है—“अगर बस कुछ इंच और आगे बढ़ जाती, तो शायद आज कहानी कुछ और होती…”
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