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कुशीनगर: योग्यता है नहीं, चला रहे निजी अस्पताल

Ved Prakash Mishra

Reported By:

Jul 15, 2021  |  3:36 PM

942 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
कुशीनगर: योग्यता है नहीं, चला रहे निजी अस्पताल WhatsApp
  • स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़
  • निजी अस्पतालों में बड़ी घटनाए होने पर पड़ती स्वास्थ्य विभाग की नजर
  • बिना पंजीकरण के क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे निजी अस्पताल

हाटा/कुशीनगर। सरकार मरीजों की सुविधा देने के लिए जहां पर सख्ती कर रही है, वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से बिना रजिस्ट्रेशन के तहसील क्षेत्र में धड़ल्ले से निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं।
स्थानीय तहसील क्षेत्र में कुछ अस्पतालों का पंजीकरण क्लीनिक के नाम पर है तो कुछ बगैर पंजीकरण के ही चल रहे हैं। इन सभी अस्पतालों ओपीडी के साथ प्रसव भी कराए जाते हैं। इन निजी अस्पतालों पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो अंकित हैं, लेकिन मरीजों का इलाज झोलाछाप ही करते हैं।

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स्थानीय नगर ही नही तहसील क्षेत्र के सुकरौली बाजार, तितला, देवराड़ पिपरा,सुबुधिया पैकोली, अहिरौली बाजार, ढ़ाढा, रामपुर बुजुर्ग, महुआरी, पन्द्रह मिल, झागा बाजार, मथौली बाजार सहित अन्य आदि स्थानों पर भी धडल्ले से प्राइवेट अस्पतालों का संचालन मानको को ताक पर रखकर किया जा रहा है। यहां पर मानक के अनुसार सुविधाएं भी नहीं है फिर भी बडे़ से बड़ा ऑपरेशन करने से भी परहेज नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते इन अस्पतालों पर कई बार जच्चा बच्चा की जान भी चली गई है। ऐसे घटनाए होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जिसके चलते इनका धंधा मजे से फल फूल रहा है। इन अस्पताल केंद्रों पर न तो हॉस्पिटल जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं और ना ही मरीजों की भर्ती करने के लिए कोई वैध लाइसेंस है। फिर भी इन अस्पताल केंद्रों पर जच्चा बच्चा नार्मल प्रसव के साथ-साथ सिजेरियन प्रसव भी पूरी तरह धड़ल्ले से कराया जा रहा है । जबकि ऐसे फर्जी अस्पतालों में हमेशा जच्चा बच्चा का जान खतरा बना रहता है।

स्थानीय तहसील क्षेत्र के चौराहों पर खुले निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पंजीकरण क्लीनिक का करवा रखे है। लेकिन इन अस्पतालों में ओपीडी के साथ- साथ प्रसव भी होता है। कुछ अस्पतालों पर कई बार असुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा बच्चा की मौत के भी कई मामले हो चुके हैं।

स्थानीय तहसील क्षेत्र में कुछ ऐसे अस्पताल संचालित हैं। जहां पर एमबीबीएस डॉक्टर ही अस्पताल का पंजीकरण करा सकते है, लेकिन कुछ ऐसे डिग्री धारक डॉक्टर हैं। जो अपना डिग्री लगाकर पंजीकरण करालेते, जिसके बदले में संबंधित अस्पताल संचालक से महीने व साल में रुपये का सौदा कर लेते है।

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