कप्तानगंज। बस्ती भक्त प्रहलाद की पुकार सुनकर भगवान ने नर्सिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया। प्रहलाद की भक्ति में इतना समर्पण था कि हिरण्यकश्यप के तमाम कष्ट भी उनकी भक्ति डिगा नहीं सके थे। हम सभी को भक्त प्रहलाद के भक्ति भाव से सीख लेना चाहिए।
उक्त बातें महुवारी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथाव्यास पं चन्द्रभान मिश्र ने कही।
कथाव्यास पं चन्द्रभान मिश्र ने कहा कि भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध करने के बाद भक्त प्रहलाद को अपनी गोद में बिठाकर कहा था कि वर मांगो। तब भक्त प्रहलाद ने अपने पिता हिरण्यकश्यप सहित सभी पाप आत्माओं का कल्याण मांगा था। साथ ही इन सभी के बदले खुद के लिए नर्क मांग लिया था। उन्होंने कहा कि स्वर्ग में सबकुछ है, लेकिन वहां पर सत्संग नहीं है। स्वर्ग मोक्ष नहीं है, स्वर्ग हमारे अच्छे कर्माे के बदले हमें मिलता है, इसके बाद हमें पुन: पृथ्वी पर आना पड़ता है, जबकि मोक्ष में इंसान का जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। स्वर्ग में रहने वाले देवता भी सत्संग का आंनद लेने के लिए पृथ्वी पर समय-समय पर आते रहते हैं। कथा व्यास ने श्री हरि की अनेक कथाओं का उपस्थित लोगों को सुनाकर भाव भिवोर कर दिया।इस दौरान यजमान शकुंतला देवी पत्नी स्व महेंद्र गिरी,राम अजोर गिरी, जनार्दन गिरी, रमेश गिरी, अनिल कुमार गिरी, संजय गिरी, सुनील गिरी, सुशील गिरी, अंकुर, चन्द्रमा देवी, मालती देवी, दुर्गावती देवी, चांदनी, प्रीति, संध्या,मीना,सीमा सहित अन्य उपस्थित रहे।
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