खड्डा/कुशीनगर। नेबुआ-नौरंगिया विकास खण्ड के मंडार विन्दवलिया के दूबे वरदान में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल जर्जर व जीर्ण शीर्ण भवन में संचालित हो रहा है। विडंबना यह है कि जर्जर भवन के बाद में ही नया भवन लगभग छ: माह पूर्व बनकर तैयार है लेकिन विभाग को हस्तांतरित नहीं होने के कारण कर्मचारी पुराने भवन में ही जान जोखिम में डालकर कार्य करने को मजबूर हैं जिससे मरीजों को भारी मुसीबत उठानी पड़ रही है।
बताते चलें कि मंडार बिंदवलियां के दूबे भरवां में आयुर्वेदिक चिकित्सालय बदहाल होने से शीलन की वजह से जहां औषधियां खराब हो रही हैं वहीं अस्पताल के कर्मचारी जर्जर भवन में ही जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं। लगभग 50 वर्ष पूर्व निर्मित आयुर्वेदिक अस्पताल के छत के प्लास्टर व गिट्टियां उखड़ चुकी है वहीं फाटक व जाली भी टूट चुके हैं। थोड़ी बरसात में ही जमीन के समानांतर नींव होने से अस्पताल में पानी घुस जाता है। वहीं फर्स भी जगह-जगह टूटकर गड्डे का रुप ले चुका है। हालांकि स्थानीय लोगों के काफी प्रयास के बाद चिकित्सालय के बगल में ही नया भवन बनकर लगभग छ: माह पूर्व ही तैयार हो गया है लेकिन विभागीय हस्तानांतरण नहीं होने से मजबूरी में मरीजों व कर्मचारियों को पुराने जर्जर भवन में ही दवा आदि करानी पड़ रही है। कृष्ण मुरारी पाण्डेय, अन्नू मिश्रा, विवेक मिश्रा, दयाशंकर, गिरधारी सहित स्थानीय लोगों ने विभाग से नये भवन में अस्पताल संचालित कराने की मांग की है।
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