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30 सितम्बर से पितृपक्षारंभ…पितृ पक्ष में क्या करें क्या न करें तो होंगे पितर सन्तुष्ट

Sanjay Pandey

Reported By:

Sep 28, 2023  |  2:26 PM

116 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
30 सितम्बर से पितृपक्षारंभ…पितृ पक्ष में क्या करें क्या न करें तो होंगे पितर सन्तुष्ट

कुशीनगर। महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान “ट्र्स्ट” के ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश पाण्डेय के अनुसार पितृपक्ष 30 सितम्बर शनिवार से आरम्भ होगा।

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#पितृपक्ष निर्णय…
यह पुनीत पर्व इस बर्ष शनिवार से आरम्भ हो रहा है उस दिन प्रातःकाल सूर्योदय से ही पितृपक्ष आरम्भ हो जाएगा। एतदर्थ उसी दिन से पितृ तर्पण व पिण्ड दानादि कार्य आरम्भ हो जायेगा।

पितृविसर्जन 14 अक्टूबर को

इस वर्ष पितृ पक्ष 15 दिन का है। “मध्याह्ने श्राद्धम् समाचरेत” अतः श्राद्ध कार्य कभी भी मध्याह्न में ही करना चाहिए। बहुत लोग इस बात से भ्रमित रहते है कि मैंने इस वर्ष अपनी कन्या या पुत्र का विवाह आदि मांगलिक कार्य किया है अतः इस वर्ष पितृ पक्ष का जल दान,अन्न दान व पिण्ड दान न करें यह अशुभ है, परन्तु निर्णयसिंधुकार के कथनानुसार सभी मांगलिक कार्यों में पितृ कार्य उत्तम व आवश्यक माना गया है। तभी तो हम जनेऊ, विवाह आदि मांगलिक कृत्य करने से पूर्व नान्दीमुख श्राद्ध अवश्य करते हैं। अभिप्रायः यह है कि हमारे यहाँ होने वाले शुभ कार्य मे किसी भी प्रकार का विघ्न न हो। यह पितृ पक्ष वर्ष में 1 वार आश्विन कृष्ण पक्ष में पितरों की पूजा हेतु आता है, कहा गया है कि देवताओं की पूजन करने में कदाचित भूल होने पर देवता क्षमा कर देते है परन्तु पितृ कार्य में न्यूनता व आलस्य प्रमाद करने से पितर असंतुष्ट हो जातें है, जिससे हमें रोग, शोक आदि भोगने पड़ते है। शास्त्रों में हर जगह नित्य देखने को मिलता है कि मातृ देवो भव, पितृ देवो भव अतः माता-पिता के समान कोई देवता नही उनकी संतृप्ति व आशीर्वाद हमें जीवन मे हर प्रकार का सुख देता है अतः इस भ्रान्ति को मन मस्तिष्क में न पालकर इस पितृ पर्व को हर्षोल्लास पूर्वक मनाना चाहिए। जिसमें नित्य जल दान व तिथि पर अन्न- वस्त्र आदि दान करना चाहिए। इस वर्ष जिनके पिता के मृत्यु तिथि ज्ञात न हो उनका श्राद्ध पितृविसर्जन को करें।

पितृ पर्व पर विशेष-

सिर का मुण्डन पितृ पक्ष के भीतर या तिथि पर नही करना चाहिए, क्यों कि धर्मसिंधु में यह बात कही गयी है कि पितृ पक्ष में सिर के वाल जो भी गिरते है वो पितरों के मुख में जातें है अतः सिर के वाल पितृ पक्ष आरम्भ होने के 1 दिन पूर्व बनवा लें या भूलवश नही बनवा पाते तो पितृ विसर्जन के दिन अपराह्न काल में बनवावें ।।
ऐसा करने से पितर सन्तुष्ट होते है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है जिससे कुल की वृद्धि व यश, कीर्ति, लाभ, आरोग्यता एवं मोनोवांछित फल की प्राप्ति होती है ।।

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