रामकोला/कुशीनगर। आर्थिक मजबूरी की वजह से रामकोला ब्लाक क्षेत्र के परोरहा गांव में एक माँ मजबूर होकर अपने दो वर्ष के लाल की मौत का इंतजार कर रही है। इस माँ के पुत्र के कमर में ट्यूमर हो गया है। किसी अच्छे डॉक्टर से दिखाने के लिए इसके पास धन नहीं है। लिहाजा मजबूर मां के सामने बच्चे की मौत के अलावे और कोई राह नही दिख रहा है। इस दलित परिवार की गरीबी की कहानी किसी किताब लिखी स्टोरी से तनिक भी कम नही है जिसमें फाकाकशी की कहानी लिखी होती है। इस परिवार के पास राशन कार्ड भी नही है कि वो मुफ्त राशन का लाभ पा सके।
ब्लाक क्षेत्र के परोरहा गांव के एक दलित परिवार में पैदा हुआ दो साल का रोहन अपनी मौत का इंतजार कर रहा है। रोहन को कमर में पीछे की तरफ ट्यूमर हो गया है। जिसके चलते रोहन विकलांग हो गया है। रोहन के पिता परशुराम के पास बेटे के इलाज के लिए इतना रुपया भी नही है जिससे वो अपने बच्चे का इलाज करवा सके। यही नहीं परशुराम के पास राशन कार्ड भी नही है और ना ही खेती करने के लिए जमीन है। वह पात्र होते हुए भी अपात्र के श्रेणी में है।परशुराम के मजदूरी पर घर का चूल्हा निर्भर है। मजदूरी कभी मिलती है कभी नही मिलती है। बच्चे की बीमारी ने परशुराम और उसकी पत्नी को तोड़कर रख दिया है, उसके सात बच्चो में रोहन सबसे छोटा बच्चा है। कुपोषण के चलते अन्य बच्चे भी अक्सर बीमार रहते है और शिक्षा से वंचित हैं। संज्ञान में आने के बाद हल्का लेखपाल योगेन्द्र गुप्ता मौके पर पहुँच कर पीड़ित परिवार को दो कंबल और कुछ आर्थिक मदद दियाा। इसके साथ ही रिपोट बनाकर उच्च अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही।
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