रामकोला/कुशीनगर। रामकोला पंजाब गन्ना समिति के सभागार में गन्ना किसान संस्थान पिपराइच गोरखपुर द्वारा गन्ना पर्यवेक्षकों के प्रशिक्षण के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया।जिसमें गन्ना शोध तकनीकी को प्रयोगशालाओं से किसानों के खेतों तक पहुंचाने व गन्ना विकास के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देने,गन्ने की उत्पादकता एवं चीनी परता में वृद्धि करने के साथ ही किसानों की आय बढ़ाने की जानकारी दी गई।
बतौर मुख्य अतिथि उप गन्ना आयुक्त देवरिया अखिलेश प्रताप सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि गन्ना विकास के लिए शासन की योजनाओं को किसानों के खेतों तक पहुंचाये ताकि दिये गये प्रशिक्षण का लाभ किसानों तक पहुंचे। श्री सिंह ने पर्यवेक्षकों से कहा कि किसानों को जानकारी दें कि गन्ने के साथ दलहन, तिलहन बोने पर अनुदान दिया जाएगा। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी ने बताया कि सेवरही गन्ना शोध संस्थान पर गन्ने की 5 प्रजातियों का बीज उपलब्ध है।
इसकी जानकारी किसानों तक पहुचाये। पादप रोग वैज्ञानिक डॉक्टर वाईपी भारती ने बताया कि गन्ने का कैंसर व काना रोग के नियंत्रण की कोई दवा नहीं है। सावधानी रखें और रोग ग्रस्त प्रजातियों को न बोये। सहायक निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि पेड़ी गन्ना की फसल में सूखी पत्ती न जलाएं। पत्ती से खरपतवार नियंत्रण होगा और नमी सुरक्षित रहेगी। प्रशिक्षण में कीट वैज्ञानिक डॉ विनय मिश्रा, डॉक्टर केपी सिंह ,मृदा वैज्ञानिक बीपी त्रिपाठी , गन्ना विकास निरीक्षक रामकोला नरेंद्र कुमार सिंह, रविंद्र द्विवेदी, डॉक्टर सत्येंद्र कुमार ,सचिव अंगद वर्मा आदि ने भी जानकारी दी।
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