रामकोला/कुशीनगर। मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र के दुःख को बिना कहे समझ जाए परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है।यह वक्तव्य रामकोला क्षेत्र के कुसम्हां गाँव के चकिया राठौर टोली में आयोजित नव दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन कथा का रसपान कराते हुए कथावाचक पं. प्रदीप सागर महराज जी ने कृष्ण- सुदामा चरित्र के वर्णन के दौरान कही।
आचार्य ने कहा कि भागवत सुदामा संसार में सबसे अनोखे भक्त रहे हैं। वह जीवन में जितने गरीब नजर आए, उतने ही वे मन से धनवान थे। उन्होंने अपने सुख व दुखों को भगवान की इच्छा पर सौंप दिया था।उन्होंने कहा कि जब सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने आए तो प्रभु ने सुदामा के फटे कपड़े नहीं देखे, बल्कि मित्र की भावनाओं को देखा। मनुष्य को अपना कर्म नहीं भूलना चाहिए। श्रीकृष्ण और सुदामा की तरह मित्रता होनी चाहिए तथा जीवन में मनुष्य को श्रीकृष्ण की तरह ही अपनी मित्रता निभानी भी चाहिए।श्रीकृष्ण और सुदामा के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए तथा आंखों में अश्रु बहने लगे।इस दौरान पंडित शिवम मिश्रा, मुख्य पुजारी गोपाल राव,ओमप्रकाश राव,लालबाबू राव,लालसाहब राव, सरोज देवी,लालबहादुर राव,गुड्डी, आयुष कुमार राव, श्याम जी राव,संजय सिंह,सरिता देवी,राजकुमारी देवी,केतक राव, अमित राव,विशाल राव,हरिकेश राव,कृष्णा राव,श्रुति,खुशी, हैप्पी राव,रवि सिंह, अभिषेक सिंह, नवल किशोर सिंह,राजन राव,अमित राव,राज राव,बलराम प्रसाद सहित काफी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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