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शिक्षा को सामाजिक चेतना का आधार बनाने वाले व्यक्तित्व रहे स्व. सुभाष : विधायक

सुनील नीलम

Reported By:

May 24, 2025  |  8:29 PM

159 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
शिक्षा को सामाजिक चेतना का आधार बनाने वाले व्यक्तित्व रहे स्व. सुभाष : विधायक
  • स्व. सुभाष यादव की द्वितीय पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा
  • सृजनशील शिक्षक, लोकतांत्रिक समाजवादी विचारक और संवेदनशील राजनीतिज्ञ को किया स्मरण
  • शिक्षा व राजनीति के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के पक्षधर थे स्व. सुभाष

तुर्कपट्टी/कुशीनगर। तमकुही विकास खंड के श्रीकृष्ण इंटरमीडिएट कालेज उजारनाथ के संस्थापक प्रधानाचार्य, पूर्व प्रधान व समाजवाद के पुरोधा स्व. सुभाष यादव की द्वितीय पुण्यतिथि पर शनिवार की सायं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

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मुख्य अतिथि फाजिलनगर के विधायक सुरेन्द्र कुमार कुशवाहा ने कहा कि स्व. सुभाष यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में दीप प्रज्वलित कर हजारों युवाओं को जीवनदृष्टि दी। वे केवल शिक्षक नहीं, ग्रामीण अंचल के विकास पुरुष थे, जिन्होंने शिक्षा को सामाजिक चेतना का आधार बनाया। उनका व्यक्तित्व एक प्रेरक स्रोत था, जिससे आने वाली पीढ़ियां सृजनशीलता और संघर्ष की ऊर्जा प्राप्त करेंगी। विशिष्ट अतिथि एपीएन न्यूज चैनल के प्रबंध संपादक विनय राय ने कहा कि स्व. सुभाष यादव विचारों के अद्भुत साधक थे, जिनकी सोच में ग्रामीण भारत की आत्मा बसती थी। वे लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रबल प्रहरी और जनसंघर्ष की अग्रिम पंक्ति के योद्धा थे। उनकी वाणी में जन-जन के सपनों की अनुगूंज थी और उनके कर्म में जनकल्याण की गूंज। ऐसे व्यक्तित्व विरल होते हैं, जो समाज को दिशा देते हैं और इतिहास में अमर हो जाते हैं। भाजपा किसान मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राधेश्याम पांडेय ने कहा कि स्व. सुभाष यादव ने किसानों की पीड़ा को अपनी पीड़ा बनाया, वे उनके सच्चे हितैषी थे। उनकी सोच में ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती और आत्मनिर्भरता की झलक थी। उन्होंने खेत-खलिहान की भाषा में बात की और गांव-गिरांव के सपनों को जमीन पर उतारने का प्रयास किया। वे वंचित वर्ग व किसानों की आवाज थे। राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुनील त्रिपाठी सुमन ने कहा कि शिक्षा उनके लिए नौकरी नहीं, तपस्या थी। वे हर विद्यार्थी में एक सृजनशील व्यक्तित्व देखना चाहते थे, जो राष्ट्र के लिए कुछ कर सके। उनके शिक्षण में अनुशासन और करुणा का अद्भुत संतुलन था। वे ज्ञान को केवल किताबों तक सीमित न मानते थे, बल्कि व्यवहार में उतारने की सीख देते थे।

प्रवक्ता संजय मिश्र ने कहा कि स्व. सुभाष यादव की शिक्षाशैली नवाचार और प्रयोगधर्मिता से भरपूर थी। वे विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते थे, उनके लिए शिक्षा जीवन जीने की कला थी। वे सृजनशील विचारों के धनी थे, जिन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदलना सिखाया। उनके विचार आज भी शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।भाजपा ओबीसी मोर्चा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष डा. डीएन कुशवाहा ने कहा कि स्व. सुभाष यादव ने सामाजिक न्याय के लिए आवाज बुलंद की, वे वंचितों और पिछड़ों की आवाज थे। उनका राजनीति में प्रवेश जनसेवा की भावना से था, उन्होंने पद को नहीं उद्देश्य को महत्व दिया। उनकी विचारधारा में समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए न्याय और अवसर की प्रतिबद्धता थी। उनका जीवन एक आदर्श था, जो संघर्ष से निखरता रहा और समाज के लिए समर्पित रहा। अध्यक्षता कर रहे एमजीआईसी सखवनिया के प्रधानाचार्य डा. सीबी सिंह ने कहा कि सुभाष यादव का जीवन संघर्ष, सृजन और संवेदना का अद्भुत संगम था। वे शिक्षक थे, परंतु उनकी दृष्टि दूरदर्शी राजनेता की थी, जो शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन लाना चाहते थे। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता, वे इस क्षेत्र के गौरव थे। सभा का संचालन नंदलाल विद्रोही ने किया।

कार्यक्रम में अजय गिरी, मैतुल मस्ताना, नवल किशोर यादव,अभिषेक यादव व आयुष श्रीवास्तव की टीम ने भजन प्रस्तुत कर उपस्थित जन को मुग्ध कर दिया। प्रधानाचार्य अमरेश कुमार यादव, नवदीप सन्देश के संपादक प्रमोद कुमार यादव ने आभार जताया। इस दौरान प्रधान राजेश उर्फ भोला शर्मा, आनंद यादव, जिला प्रभारी रोहित यादव, दुर्गेश यादव, प्रधानाचार्य नियामत अली, राजकिशोर राय, नथुनी यादव, अरविंद राय, वीरेंद्र राय, प्रकाशचंद श्रीवास्तव, डीके राय, कामेश्वर सिंह, टीपी सिंह, सहाबुद्दीन अंसारी आदि उपस्थित रहे।

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