News Addaa WhatsApp Group Join करें

आधुनिकता के दौर में लुप्त हो गयी सावन की कजरी!

Surendra nath Dwivedi

Reported By:

Jul 8, 2020  |  9:53 AM

1,488 लोगों ने इस खबर को पढ़ा.
आधुनिकता के दौर में लुप्त हो गयी सावन की कजरी!
  • आधुनिकता के दौर में लुप्त हो गयी सावन की कजरी
  • बलम मेहदी मँगाय,द,मोती झील से जाय के सायकिल से ना ।

सुरेन्द्र/कुशीनगर

आपके लिए और..- हत्या के दोषी को उम्रकैद: तरयासुजान पुलिस की मजबूत पैरवी...

सावन मास रिमझिम बारिश व फुहारों के साथ आज काले कजरारे बादल उमड घुमड के साथ बरस रहे हैं, मेढक की टर्र टर्र की आवाज तालाब पोखरो मे हिचकोले ले रहे हैं और सावन की ठण्डी और सुगंधित हवाएँ अँगडाई ले रही हैं लेकिन समसामयिक सावनी गीत कजरी कही सुनाई नहीं दे रही जिससे मदमस्त हवाएं चलने व पपीहा पी कहाँ बोलने में सँकोच कर रहा है।
तब-तक परदेश गए अपने पति से एक सखी फोन पर कह बैठती हैं

बलम मेँहदी मँगाय ,द,मोती झील से जाय ,के,सायकिल से ना, दूसरी नायिका के घर बरसात में टपक रहे थे और पति का अभाव खटक रहा था बरस,बरस ,असरेशवा चुवेला बखरी इसी क्रम में तीसरी नायिका को लहलहाती धान की हरी भरी फसलों को देखकर जब सावन मास सताने लगता है तबतक करवट बदलती हुई फोन पर *सँदेशा भेजती हुई कहती हैं कि झुला डाल देब नेबुला अनार मे सावन के बहार मे ना।। लेकिन फिर भी सावन की टपकती बूँदें ,रिमझिम फुहार और पपीहा की बोली नायिका को टीस पहुंचा रही हैं। सावन मास का आज तीसरा दिन है चँहुओर धान की हरियाली छाई हुई है वही हाट बाजारों में बिक रही हरी हरी चुडिया, हरी हरी चुनरिया, सावन आने का एहसास करा रही हैं। लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना सावनी गीतों पर भारी पड़ रहा है जिससे कोसो दूर सावनी गीत कजरी नहीं सुनाई दे रही हैं ,न ही गाँव, देहात,व बाजार के पेडों पर झूला नहीं दिखाई दे रहा है।तब तक खेतों में धान की रोपाई कर रही युवतियों ने रिमझिम फुहारों के आनन्द से रोमाँचित व पुलकित हो गाती हैं अँग ,अँग ,पोर पोर मे उठेला दरदिया पिया बिन भावे न सवनवा ना।।, इस तरह से पारम्परिक गीतों से आज इस सावन मास से ओत- प्रोत हो महिलाएं गुनगुना रही हैं तो वहीं विरहिणी नायिकाएं नायक से सावन आने की याद भी दिला रही हैं। लोगों का कहना है समय-समय पर हर गीतों का महत्व है लेकिन आज इस बदलते परिवेश व आधुनिकता के दौर में धीरे धीरे झूला और कजरी गीत लुप्तप्राय होता जा रहा है।बुजुर्गों का मानना है कि सावन मास जैसे ही आने का इशारा करता था उसके पहले ही चहुंओर झूला और कजरी गीतों का आनन्द उठाते लोग देखे जाते थे ,लेकिन आधुनिकता के दलदल में फँसता जा रहा हर व्यक्ति अपनी सँस्कृति और रीति रिवाज, परम्परा व समसामयिक गीत गवनई को भूलता जा रहा जिससे सावन मनभावन उदास दिखाई दे रहा है।

ताज़ा मौसम अपडेट
संबंधित खबरें
हत्या के दोषी को उम्रकैद: तरयासुजान पुलिस की मजबूत पैरवी रंग लाई, ऑपरेशन कन्विक्शन में मिली बड़ी कामयाबी
हत्या के दोषी को उम्रकैद: तरयासुजान पुलिस की मजबूत पैरवी रंग लाई, ऑपरेशन कन्विक्शन में मिली बड़ी कामयाबी

कुशीनगर। हत्या के एक चर्चित मामले में तरयासुजान पुलिस की प्रभावी पैरवी और सशक्त…

‘ऑपरेशन मजनू’ का बड़ा एक्शन: 6 युवक गिरफ्तार, 2 वाहन सीज, 10 के कटे चालान
‘ऑपरेशन मजनू’ का बड़ा एक्शन: 6 युवक गिरफ्तार, 2 वाहन सीज, 10 के कटे चालान

कुशीनगर। महिला सुरक्षा और छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से…

सैंथवार मल्ल समाज की एकजुटता पर दिया गया जोर
सैंथवार मल्ल समाज की एकजुटता पर दिया गया जोर

मथौली बाजार कुशीनगर: हाटा तहसील क्षेत्र के भैंसही बाजार में रविवार को एक मैरेज…

कोचिंग में शर्मनाक हरकत का आरोप: छात्रा ने चप्पलों से पीटा वीडियो वायरल
कोचिंग में शर्मनाक हरकत का आरोप: छात्रा ने चप्पलों से पीटा वीडियो वायरल

कुशीनगर। जिले के सेवरही कस्बे स्थित एक कोचिंग सेंटर में उस समय हंगामा मच…

Advertisement
News Addaa Logo

© All Rights Reserved by News Addaa 2020

News Addaa Breaking