कुशीनगर । सरस्वती माता को ज्ञान की देवी माना जाता है।परंतु विगत एक दशक से सरस्वती पूजनोत्सव के नाम पर जिस तरह की अपसंस्कृति फैलाया जा रहा है।वह अगर नहीं रोका गया तो आने वाले दिनों में अनेक प्रकार की समस्याओं को जन्म देगा।
पहले सरस्वती माता की पूजा विद्यालयों तक सीमित थी।जब से यह विद्यालयों से निकल कर गली-मुहल्ले में फैला है तब से अपसंस्कृति ने जोर पकड़ना शुरू किया है।कोढ़ में खाज की स्थिति यह कि भोजपुरी के नाम पर साफ्ट पोर्न परोसने वाले ये कथित गायक और गीतकार।सबसे चिंताजनक यह कि सौफ्ट पोर्न ये गीत जिनके बोल सुन कर शर्मिंदा होना चाहिए। वहाँ पर यह लोक संस्कृति का हिस्सा बनते जा रहा है।हाईकोर्ट के रोक के बावजूद धड़ल्ले से बजने वाले ये गीत रहरी में बहरी…,जाईं ना बहरिया…,मोलायम कर$….,पहिले अंगुरी …सात आईटम..पोखरी में अपना…जैसे सैंकड़ों गीत और गायकों का अगर बहिष्कार नहीं किया गया।बच्चों को रोका नहीं गया तो रिश्ते-नाते कहीं के नहीं रहेंगे
क्योंकि जिस तरह से माता-पिता,भाई-बहन,चाचाचा-चाची,फुआ-फुफा आदि के सामने इन गीतों पर किशोर-युवा थिरक रहे हैं।वह उस आने वाली समस्याओं की चेतावनी है जिसमें शर्म-लिहाज सब कुछ छुट जाता है।फिर कुछ बच नहीं जाता।यहाँ तक कि दोष देने लायक भी नहीं रह पाईएगा।इसलिए यह समय जगने का है परिवार, समाज,सरकार इसके खिलाफ खड़ा नहीं होता है तो फिर रोने के अलावे कोई विकल्प नहीं रहेगा।
बहरहाल समाज के जागरूक लोगो को आगे आने की आवश्यकता है,जिससे युवा पीढ़ी को जागरूक कर इस सभ्यता पर विराम लगाए जा सके।
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