रामकोला/कुशीनगर। मतदान को सिर्फ दो दिन बचे हैं लेकिन चुनावी समीकरण अभी भी उलझा हुआ है। मतदाताओं की चुप्पी के कारण राजनीतिक जानकार भी चुप्पी साधे हुए हैै।वह भी इस बार मतदाताओं का रुख नहीं भांप पा रहे हैं। मतदाताओं द्वारा किसी का भी खुला समर्थन न करने के कारण माहौल का पता नहीं लग पा रहा है।जिले की सातों विधानसभा सीटों के लिए छठे चरण में तीन मार्च को मतदान होगा। जिसके लिए प्रत्याशियों ने मेहनत कर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। क्षेत्र में भ्रमण के दौरान दिख रही वोटरों की खामोशी से प्रत्याशियों में भी बेचैनी बढ़ गयी है। सोशल मीडिया व समर्थकों के माध्यम से प्रत्याशियों का मतदाताओं से संपर्क करने का अथक प्रयास जारी है।चुनाव आयोग के निर्देश के अनुपालन में संसाधनों की कमी की वजह से इस बार पहले जैसा चुनावी शोरगुल नहीं दिख रहा है। ना पहले की तरह लाउडस्पीकर लगे वाहन गांव- गांव में नजर आ रहे है और नाही प्रत्याशियों द्वारा चौराहे पर नुक्कड़ सभाएं हो रही है।
चुनावी महाभारत में एक-दूसरे को पछाड़ने की तैयारी में प्रत्याशी लगे हुए हैं और मतदाता शांत होकर चुनावी दंगल का आनंद उठा रहे हैं।जिसके कारण जिले की सातों विधानसभा सीटों पर रोचक मुकाबले की पृष्ठभूमि तैयार हो रही है। जिसमें जाति, धर्म के समीकरण का कितना असर होगा इसकी सही तस्वीर 10 मार्च को मतगणना के दिन ही साफ होगी।
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